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निकली थी बिना नकाब आज वो घर से
मौसम का दिल मचला लोगोँ ने भूकम्प कह दिया

अगर तुम समझ पाते मेरी चाहत की इन्तहा
तो हम तुमसे नही तुम हमसे मोहब्बत करते

अमीरों के लिए बेशक तमाशा है ये जलजला,
गरीब के सर पे तो आसमान टुटा होगा.

नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा. . . .
बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है. .

कुछ इसलिये भी ख्वाइशो को मार देता हूँ
माँ कहती है घर की जिम्मेदारी है तुझ पर

नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा. . . .
बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है. .

जो मेरे बुरे वक्त में मेरे साथ है
मे उन्हें वादा करती हूँ मेरा अच्छा वक्त सिर्फ उनके लिए होगा

ये जो छोटे होते है ना दुकानों पर होटलों पर और वर्कशॉप पर
दरअसल ये बच्चे अपने घर के बड़े होते है

कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने
मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये

मोत से तो दुनिया मरती हैं
आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं

दिल टूटने पर भी जो शख्स आपसे शिकायत तक न कर सके…
उस शख्स से ज्यादा मोहब्बत आपको कोई और नही कर सकता

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