रोना ही है ज़िन्दगी तो हँसाया क्यो..
जाना था दूर तो नज़दीक़ आया ही कयो..
जाना था दूर तो नज़दीक़ आया ही कयो..
रोने से और इश्क़ मे बे-बाक हो गए..
धोए गए हम इतने कि बस पाक हो गए।
कुछ लोग जमाने में ऐसे भी तो होते हैं..
महफिल में तो हंसते हैं तन्हाई में रोते हैं !!
तूने मेरा आज देख के मुझे ठुकराया है…
हमने तो तेरा गुजरा कल देख के भी मोहब्बत की थी|
एहसान जताना जाने कैसे सीख लिया..
मोहब्बत जताते तो कुछ और बात थी।
कितने मज़बूर है हम तकदीर के हाथो..
ना तुम्हे पाने की औकात रखतेँ हैँ, और ना तुम्हे खोने का हौसला.!!
पहले ज़मीं बाँटी फिर घर भी बँट गया..
इनसान अपने आप मे कितना सिमट गया|
रूकता भी नहीं ठीक से चलता भी नही..
यह दिल है के तेरे बाद सँभलता ही नही|
सुनो एक बार और मोहब्बत करनी है तुमसे,
लेकिन इस बार बेवफाई हम करेंगे.
तकलीफ़ मिट गई मगर एहसास रह गया..
ख़ुश हूँ कि कुछ न कुछ तो मेरे पास रह गया|
No comments: